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पटोली एक पारंपरिक मीठी इडली है जो तटीय और कोंकणी व्यंजनों की आत्मा को खूबसूरती से दर्शाती है। नरम चावल के घोल से बनी और ताजे कद्दूकस किए हुए नारियल और गुड़ के स्वादिष्ट मिश्रण से भरी हुई, यह मिठाई ताजे हल्दी के पत्तों के अंदर धीरे-धीरे स्टीम की जाती है। पटोली को खास बनाता है इसका स्वाद ही नहीं, बल्कि हल्दी के पत्तों की वह अनोखी खुशबू जो स्टीमिंग के दौरान इडली में समा...
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इडली चावल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें। मिक्सर जार में भिगोए हुए इडली चावल, भिगोया हुआ पोहा और थोड़ा-थोड़ा करके भिगोए हुए इडली चावल का पानी डालें।
थोड़ा पानी डालकर एक चिकना और थोड़ा गाढ़ा घोल पीस लें। नमक डालने के बाद हाथ से फेंट लें।
घोल चिकना होना चाहिए लेकिन इतना सख्त नहीं कि पानी में मिल न सके।
नारियल, कद्दूकस किया हुआ गुड़, इलायची, तिल और एक चुटकी नमक मिलाएं। भरावन को अलग रख दें।
हल्दी के पत्तों को धोकर साफ करें। अगर पत्ते बहुत बड़े हों, तो उन्हें दो हिस्सों में काट लें।
पत्ते के बीच में चावल के घोल की एक परत लगाएं, किनारों से बचते हुए। बीच में नारियल-गुड़ की भरावन डालें।
पत्ते को सावधानी से मोड़ें ताकि भरावन ढक जाए और ज्यादा न भरे।
पटोली को स्टीमर में लगाएं। मध्यम आंच पर 15–20 मिनट तक स्टीम करें जब तक चावल की परत पक न जाए।
इसे ठंडा होने दें, फिर घी के साथ गरमागरम परोसें।
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सिर्फ ताजे हल्दी के पत्तों का उपयोग करें। कोमल, ताजे पत्ते सबसे अच्छी खुशबू देते हैं। सूखे या फटे पत्तों से खुशबू कम हो जाती है।
भरावन का संतुलन बनाए रखें। नारियल-गुड़ का मिश्रण न ज्यादा गीला हो और न ही सूखा।
घोल गाढ़ा लेकिन चिकना होना चाहिए ताकि सही स्थिरता बनी रहे।
पतली परत समान रूप से पकती है और पटोली को नरम रखती है, गाढ़ा नहीं बनाती।
पत्तों को ज्यादा न भरें ताकि स्टीमिंग के दौरान भरावन बाहर न निकले।
घी के साथ गरमागरम परोसें ताकि स्वाद और बढ़ जाए।
पटोली को यादगार भोजन क्यों माना जाता है?
क्योंकि यह पीढ़ियों से सिखाई गई रेसिपी है, जो आजी के रसोईघर, त्योहारों और घर की याद दिलाती है।
पटोली क्या है?
पटोली एक पारंपरिक मीठी इडली है जो चावल के घोल और नारियल-गुड़ की भरावन से बनाई जाती है, और सुगंधित हल्दी के पत्तों में स्टीम की जाती है।
हल्दी के पत्तों की जगह केले के पत्तों का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?
हल्दी के पत्ते पटोली को उसकी खास मिट्टी जैसी खुशबू और हल्का स्वाद देते हैं, जो केले के पत्ते नहीं दे सकते।
पटोली किस त्योहार पर बनाई जाती है?
यह आमतौर पर नाग पंचमी, गणेश चतुर्थी और मानसून के मौसम में बनाई जाती है।
क्या पटोली बिना हल्दी के पत्तों के बनाई जा सकती है?
हां, इसे केले या कटहल के पत्तों का उपयोग करके भी बनाया जा सकता है। इनके अपने अलग-अलग विशेष स्वाद होते हैं।

Cooking has always been my way of spreading love and warmth. Through this channel, I share recipes close to my heart—some from childhood memories, some from daily life, and some festive treats. It’s my little space to celebrate the joy of homemade food and connect with fellow food lovers.
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